गुंडरदेही।
*बसों की हेडलाइट, हॉर्न, वाइपर तक खराब, फिर भी सड़कों पर दौड़ रहे यात्री वाहन*
*राजनांदगांव–बालोद।* राजनांदगांव से बालोद मार्ग पर संचालित हो रही कुछ ट्रैवल एजेंसियों की बसों की हालत को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कई बसें बेहद खराब एवं जर्जर स्थिति में होने के बावजूद यात्रियों को लेकर लगातार सड़क पर दौड़ रही हैं। कई बसों में हेडलाइट तक सही नहीं है, कहीं हॉर्न खराब है तो कहीं वाइपर ठीक से काम नहीं करते। इसके बावजूद परिवहन विभाग द्वारा इन वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से आरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सड़क पर चलने वाली बस की हेडलाइट, हॉर्न, वाइपर, ब्रेक या अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण सही स्थिति में नहीं हैं, तो उसे फिटनेस कैसे मिल रही है? और यदि फिटनेस एवं परमिट की जांच की जाती है, तो ऐसी बसें लगातार यात्रियों को लेकर सड़क पर कैसे दौड़ रही हैं?
*क्या ट्रैवल एजेंसियों के आगे आरटीओ अधिकारी बेबस हैं?*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रैवल एजेंसियों की मनमानी पर परिवहन विभाग के अधिकारी आंखें बंद किए हुए हैं। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि क्या कुछ आरटीओ अधिकारी ट्रैवल एजेंसियों से कथित रूप से मिले हुए हैं? क्या इसी कारण नियमों का खुलेआम उल्लंघन करने वाली बसों पर कार्रवाई नहीं हो रही है?
यदि विभाग अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभा रहा है तो राजनांदगांव–बालोद मार्ग पर चलने वाली बसों की अचानक एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
*रात में बिना सही हेडलाइट के बस संचालन से यात्रियों की जान खतरे में*
किसी भी यात्री बस के लिए हेडलाइट केवल सुविधा नहीं बल्कि सुरक्षा का अनिवार्य साधन है। रात के समय खराब या बंद हेडलाइट के साथ बस का संचालन सड़क पर गंभीर दुर्घटना को न्योता दे सकता है।
इसके बावजूद यदि ऐसी बसें नियमित रूप से संचालित हो रही हैं तो यह केवल परिवहन नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।
*परमिट और फिटनेस की भी हो जांच*
शिकायतें केवल बसों की तकनीकी खराबियों तक सीमित नहीं हैं। कुछ बसों के परमिट की वैधता समाप्त होने तथा एक ही परमिट के आधार पर अलग-अलग बसों के संचालन की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कौन-कौन सी बसें वैध परमिट एवं फिटनेस के साथ संचालित हो रही हैं और किन वाहनों के दस्तावेजों में कमी है।
आरटीओ विभाग के अधिकारियों पर भी हो निष्पक्ष जांच
यदि ट्रैवल एजेंसियां नियमों का उल्लंघन कर रही हैं और इसके बावजूद लंबे समय से उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल ट्रैवल एजेंसी की नहीं बल्कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की भी तय होनी चाहिए।
आरटीओ विभाग के कुछ अधिकारियों पर ट्रैवल एजेंसियों से मिलीभगत एवं कथित रूप से बिके होने जैसे गंभीर आरोप जनता के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन आरोपों को दबाने के बजाय विभाग को स्वयं निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से यह साबित किया जाए कि विभाग द्वारा नियमों का पालन पूरी ईमानदारी से कराया जा रहा है। और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं ट्रैवल एजेंसियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
*प्रशासन से हमारी प्रमुख मांगें*
* राजनांदगांव–बालोद मार्ग की सभी यात्री बसों की अचानक विशेष जांच कराई जाए।
* प्रत्येक बस की हेडलाइट, ब्रेक, हॉर्न, वाइपर, टायर एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच हो।
* सभी बसों के फिटनेस प्रमाण-पत्र की जांच की जाए।
* परमिट की वैधता एवं परमिट की शर्तों की जांच हो।
* एक परमिट पर दूसरी बस चलाने की शिकायत की जांच की जाए।
* नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
* पिछले एक वर्ष में संबंधित बसों की हुई आरटीओ जांच एवं कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।
* ट्रैवल एजेंसियों और आरटीओ अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
* दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं वाहन संचालकों पर समान रूप से कार्रवाई की जाए।
“आरटीओ की जिम्मेदारी केवल कागज देखने की नहीं, सड़क पर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है।”
राजनांदगांव–बालोद मार्ग पर रोजाना हजारों लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कंडम बसें, खराब हेडलाइट और तकनीकी खामियों वाले वाहन यदि बिना रोक-टोक सड़कों पर दौड़ते रहे तो किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने का कोई औचित्य नहीं रहेगा।
इसलिए प्रशासन से मांग है कि हादसे का इंतजार करने के बजाय अभी से कठोर जांच एवं कार्रवाई की जाए।

